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मशहूर गायक सिद्धू मूसे वाला की गंगेस्टरों ने गोली मारकर की हत्या..

लाखों दिलों पर राज करने वाले पंजाब के गायक सिद्धू मूसेवाला की रविवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई है. मूसेवाला पर मानसा के जवाहर के गांव के पास कई राउंड फायरिंग की गयी और उनपर ३० राउंड फायरिंग की गयी 3 गोली गाड़ी के ड्राईवर पर फायरिंग किया फिर पीछे से फायरिंग की गयी ताकि सिद्धू के बचने की कोई उम्मीद ना रह जाये. घटना के बाद मूसेवाला को गंभीर हालत में मानसा के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. घटना में मूसेवाला के साथ रहे दो अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि मूसेवाला को 2 दिनों पहले उनकी एक फ़ोन कॉल पर तीखी झड़प भी हुई. इसके बावजूद पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए एक दिन पहले ही मूसेवाला समेत 424 VIP की सुरक्षा वापस ली थी.                                          1653832864722मूसेवाला ने पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के विजय सिंगला के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था.शनिवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने मूसेवाला समेत कुल 424 VIP लोगों की सुरक्षा पर कैची चलाई थी. इस लिस्ट में डेरामुखी सहित कई सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं. वर्तमान और पूर्व विधायकों की सुरक्षा भी वापस ली गई है. इनमें शिअद के वरिष्ठ नेता चरण जीत सिंह ढिल्लों, बाबा लाखा सिंह, सतगुरु उधय सिंह, संत तरमिंदर सिंह भी शामिल हैं. इसके अलावा विधायकों में अकाली नेता गनीव कौर मजीठिया, कांग्रेस नेता परगत सिंह, आप विधायक मदन लाल बग्गा का सुरक्षा कवर भी वापस ले लिया गया है. बताया जा रहा है कि सरकार ने पहले एक रिव्यू मीटिंग की थी, उसके बाद इन लोगों की सुरक्षा वापस लेने का फैसला हुआ था.                                                                                              अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने अपने बयान में साफ कहा है कि ये आदेश सिर्फ कुछ समय के लिए लागू किया गया है. राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जवानों की जरूरत है, इसी वजह से रिव्यू मीटिंग के बाद 424 लोगों की सुरक्षा वापस ली गई है. अब उन जवानों को राज्य के अलग-अलग इलाकों में तैनात किया जाएगा.                                                                                                              इससे पहले अप्रैल महीने में भी भगवंत सरकार ने 184 वीआइपी लोगों की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया था. तब पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री सहित कई विधायकों की सुरक्षा पर कैची चली थी. उन सभी नेताओं को पंजाब सरकार ने प्राइवेट सिक्योरिटी दे रखी थी.