जिस किन्नर बच्चे को माँ ने घर से भगाया था, वही आज बना पहला पायलेट ट्रांसजेंडर

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समाज भी एक अजीब सा शब्द है। हर जगह इसकी परिभाषा अलग अलग है। समाज सिर्फ महिला और पुरुष को स्वीकार करती है, क्योंकि ये दोनों मिल कर पीढ़ी को आगे बढ़ाते है और किन्नर (Transman) का एक अलग ही समाज होता है। परंतु ये तो भगवान की ही देंन है, तो ये समाज से अलग क्यों माने जाते हैै।

पहले तो इनको कोई अधिकार नहीं दिए गए थे, पर आज देश में इस वर्ग को भी उनके अधिकार मिल चुके हैं।कोर्ट ने उन्हें कानूनी मान्यता दे दी है। उन्हें अब अपनी पहचान छुपाने की आवश्कयता नहीं है, परंतु समाज में रहने बाले लोगो की सोच बदलने में सभी नाकाम हुए एक माँ जिसे ममता की मूर्ति और प्रेम की देवी कहा जाता है।

माँ के लिए तो उसका बच्चा काला हो गोरा हो या अपाहिज उसे स्वीकार होता है, परंतु एक किन्नर बच्चे (Kinnar Kids) की माँ ने ही अपने बच्चे को घर से निकाला और दर बदर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ दिया। आइये आज इस खबर के जरिये से जानते है, फिर उस बच्चे के साथ क्या हुआ।

कौन है वह बच्चा: एडम हैरी

Adam Harry, जो केरल (Kerala) राज्य के थ्रि‍सुर (Thrissur) जिले के निवासी है। हैरी के अभिभावक को जब जानकारी लगी की उनका बेटा एक किन्नर है। पहले तो उन्होंने उसे एक रूम में बंद कर दिया। जब उस बच्चे की उम्र करीब 19 साल थी। इस बीच उनके माता पिता द्वारा उनको खूब प्रताड़ित किया गया।

शाररिक और मानसिक रूप से वह प्रताड़ित किये गये। उसके बाद उनको घर से निकल दिया और सारे रिश्ते खत्म कर दिए घर से निकालते वक़्त हैरी की किसी ने कोई सहायता नहीं की यहाँ तक की उनके पास पैसे भी नहीं थे। इस वजह से उनको फुटपाथ पर रहना पड़ा। इतने संघर्ष पूर्ण जीवन में भी उनके कदम डगमगाए नहीं, जिनके हौसलों में दम होता है, उन्ही के सपनो में उड़न होती है। इस बात को सच साबित करके दिखाया।

क्या थे हेरी के सपने:

हैरी एक कमर्श‍ियल पायलट बनना चाहते थे। परंतु समय की मार से वह थोड़े घबरा गए। परंतु हार नहीं मानी। कई राते फुटपाथ पे बिताई। ना खाने को मिला ना ठीक से सोने को उसके बाद भी जीवन की इस सच्चाई से लड़े और आज देश की शान है।

जानकारी के अनुसार हैरी बचपन से ही एक पायलट (Pilot) बनना का सपना देखा करते थे। इसके लिए उन्होंने प्राइवेट पायलट लाइसेंस का एग्जाम साल 2017 में पास कर लिया था और जोहानसबर्ग में उसे लाइसेंस भी मिला।

उनके जीवन में ऐसा मोड़ भी आया, जब अपना खर्चा चलाने के लिए एक छोटी सी जूस की दुकान पर काम किया। कुछ लोग उन्हें अजीब नजर से देखा करते थे, पर उनपर कोई खास असर न हुआ। अब बिना रुके आगे बढ़ते गए। उंन्होने अपने सपनो को पूरा करने के लिए बहुत कठिन परिश्रम किया। विकट परिस्थितियों से भी हार नही मानी।

किस तरह किया अपना सपना पूरा: कुछ समय पश्चात उन्हें एविएशन एकेडमिक्स संस्थाओं में पार्ट टाइम की जॉब मिली। परंतु वहां भी उनके साथ पक्षपात हुआ। इसके बाद हेरी ने सोशल जस्टिस विभाग से अपनी आगे स्टडी को जारी रखने के लिए सहायता की मांग की। जिससे उनको एशियन अकैडमी को Join करने की सलाह दी गई और फिर हेरी ने राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन एंड टेक्नोलॉजी को Join किया।

यही से उनकी जिंदगी पलट दी और वह कमर्शियल पायलट बन कर देश के सामने आए लोगों की नफरत को उन्होंने मोहब्बत में बदल दिया। आज उनकी काबिलीयत पर पूरा देश सलाम कर रहा है। कही न कही उनके अभिभावक को अपने अंदर एक पछतावा होगा।

समय का फेरबदल:

एक कहावत है कि किसी का समय एक जैसा नहीं होता इस लिए परिस्थिति से लड़ना है। उससे डरना नहीं है। कभी भी किसी की बात को लेकर अपने सपनो से पीछे नही हटना। अगर आपने जुनून और जसवा होगा तो आप हर सपने को पूरा करने में सफल होंगे। हैरी एडम किन्नर समाज के लिए एक गौरव है। हेरी ने पूरे देश का इतिहास बदल दिया।

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